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सरकारी अस्पताल से पीपीपी मोड से हटाए गए कर्मचारियों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा

आपको बता दे कि वर्ष 2020 में उत्तराखंड सरकार द्वारा रामनगर के सरकारी अस्पताल को पीपीपी मोड पर दिया गया था सरकार की सोच थी कि पीपीपी मोड पर अस्पताल देने के बाद यहां आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा लेकिन जब से यह अस्पताल पीपीपी मोड पर गया था तब से ही लगातार बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार चर्चाओं में था अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने के लिए कई बार धरना प्रदर्शन भी किए गए तो वही लैंस डाउन के भाजपा विधायक महंत दिलीप सिंह रावत ने भी इस अस्पताल की लचर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कड़ी नाराज की जताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की थी भारी विरोध के बाद सरकार ने आखिरकार इस अस्पताल को इसी 1 अप्रैल से पीपीपी मोड से हटाकर अपने नियंत्रण में ले लिया हालांकि अभी अस्पताल के सरकारी तंत्र में जाने के बाद स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है लेकिन सरकार और अधिकारी अस्पताल में अब बेहतर सुविधा देने की बात कर रहे हैं अभी कुछ सामान पीपीपी मोड संचालकों द्वारा अस्पताल के हैंडोवर नहीं किया गया है जिस कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है तो वहीं पीपीपी मोड के तहत काम करने वाले करीब 300 कर्मचारियों को हटा दिया गया जिसके बाद इन कर्मचारियों ने बुधवार को अस्पताल से कुछ दूरी पर धरना प्रदर्शन करते हुए प्रदेश सरकार एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने के साथ ही प्रदर्शन किया इन कर्मचारियों का कहना था कि आज सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें नौकरी से हटकर बेरोजगार किया गया उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूर्व में सरकार ने तीन-तीन माह तक पीपीपी मोड का कार्यकाल बढ़ाया था तो उसी प्रकार उन्हें भी तीन महापूर्व कम से हटाए जाने का नोटिस दिया जाता उन्होंने कहा कि आज प्राइवेट अस्पतालों में भी उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है कर्मचारियों का कहना था कि कुछ लोग जो यहां पर काम करते थे उनके पास डिग्री थी कुछ लोग बिना डिग्री के ही अपनी सेवा दे रहे थे तथा कोरोना काल में भी उन्होंने यहां अपनी सेवाएं दी थी उन्होंने कहा कि आज जहां एक और इतने कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं तो वहीं उनके आगे रोजी-रोटी का संकट भी गहराने लगा है उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि या तो इस अस्पताल को पुनः पीपीपी मोड पर दिया जाए या फिर उनकी नौकरी के लिए कोई सुनिश्चित योजना तैयार की जाए मांग पूरी न होने पर कर्मचारियों ने उग्र आंदोलन करने की चेतावनी की दी है।