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सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार की जिम्मेदारी समझनी चाहिए………रुचि भट्ट

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए “गद्दार” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाना बेहद शर्मनाक, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। यह बयान केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि देश की जनता द्वारा दिए गए जनादेश और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।

राहुल गांधी लगातार अपनी राजनीतिक निराशा और असफलता को आक्रामक एवं असंयमित भाषा के माध्यम से छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। जब किसी राजनीतिक दल के पास जनता के बीच जाने के लिए मुद्दे, दृष्टि और नेतृत्व का अभाव हो जाता है, तब वह केवल आरोप, नफरत और अशोभनीय शब्दों की राजनीति पर उतर आता है। कांग्रेस आज उसी दौर से गुजर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने बार-बार भारी समर्थन देकर चुना है। ऐसे में उनके लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग वास्तव में करोड़ों देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन आलोचना और अभद्रता के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है। दुर्भाग्य से राहुल गांधी बार-बार उस सीमा को लांघने का काम करते हैं।

भाजपा महिला मोर्चा की ओर से मैं स्पष्ट कहना चाहती हूं कि देश की महिलाएं इस तरह की विषैली और गैर-जिम्मेदार राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगी। भारतीय संस्कृति संवाद, शालीनता और सम्मान की राजनीति सिखाती है, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व लगातार समाज में कटुता और नकारात्मकता फैलाने का काम कर रहा है।

आज भारत विश्व मंच पर मजबूती से अपनी पहचान बना रहा है। देश विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में विपक्ष से रचनात्मक सुझावों की अपेक्षा होती है, लेकिन कांग्रेस केवल देश का माहौल खराब करने और जनता को भ्रमित करने में लगी हुई है।

मैं राहुल गांधी से मांग करती हूं कि वे अपने बयान पर तुरंत देश से माफी मांगें। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार की जिम्मेदारी समझनी चाहिए। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन राष्ट्र और लोकतंत्र की गरिमा से ऊपर कोई नहीं हो सकता।

भाजपा महिला मोर्चा देश के सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रधानमंत्री के प्रति इस तरह की अमर्यादित टिप्पणियों का कड़ा विरोध करता है और कांग्रेस पार्टी से जवाब मांगता है कि क्या यही उनकी राजनीति का स्तर रह गया है।